इस नवंबर के बिजली बिल में पूरी राहत-अवधि की सबसे गहरी FPPAS कटौती दर्ज होगी। यूपीपीसीएल ने 28 अक्टूबर को घोषणा की कि नवंबर 2026 के बिलों में FPPAS लाइन −9.17% रहेगी। इसका मतलब है प्रदेश भर के उपभोक्ताओं को करीब ₹645 करोड़ की वापसी, और वह भी दिवाली के महीने में। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे इस व्यवस्था में अब तक की सबसे बड़ी राहत बताया है।
यूपीपीसीएल ने 28 अक्टूबर को क्या घोषित किया

FPPAS यानी ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार नवंबर के बिलों में −9.17% रहेगा। यह कटौती घरेलू, व्यावसायिक समेत अन्य सभी श्रेणियों और पांचों वितरण कंपनियों के उपभोक्ताओं पर एक समान लागू होगी। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नीतीश कुमार ने कहा कि यह लगातार पांचवां महीना है जब इस व्यवस्था से बिल घटे हैं, क्योंकि बिजली खरीद और ईंधन की वास्तविक लागत टैरिफ में तय अनुमान से कम रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बचत का अनुमान करीब ₹645 करोड़ बताया। उनके मुताबिक यह राहत उपभोक्ता परिषद की मांग पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आदेश से मिली है। न्यूज़18 ने प्रभावित उपभोक्ताओं की संख्या करीब 3.5 करोड़ बताई है।
पांच महीनों का सिलसिला, और नवंबर सबसे बड़ा क्यों
FPPAS तीन महीने पीछे चलता है। यूपीआरसी की बहुवर्षीय टैरिफ विनियमावली, 2025 के तहत किसी महीने की लागत-अंतर की वसूली या वापसी तीसरे महीने के बिल में होती है। इसलिए नवंबर के बिल में अगस्त 2026 की खरीद लागत का हिसाब आएगा।
| किस महीने का बिल | लागू FPPAS | किस महीने की लागत पर |
| जून 2026 | +10.00% (मासिक सीमा) | मार्च 2026 |
| जुलाई 2026 | −4.43% | अप्रैल 2026 |
| अगस्त 2026 | −2.92% | मई 2026 |
| सितंबर 2026 | −7.93% | जून 2026 |
| अक्टूबर 2026 | −5.24% | जुलाई 2026 |
| नवंबर 2026 | −9.17% (28 अक्टूबर को घोषित) | अगस्त 2026 |
जून इसी लाइन का उल्टा चेहरा था। उस महीने लागत स्वीकृत स्तर से ऊपर चली गई थी, इसलिए बिलों में +10% लगा, जो नियमों की सीमा है। जुलाई से हर महीना उल्टी दिशा में गया, और नवंबर का −9.17% इस दौड़ की सबसे गहरी कटौती है। इसी साइट का अक्टूबर का लेख बता चुका था कि नवंबर की दर अगस्त की लागत के हिसाब से आएगी। अब वह आंकड़ा आ गया है, और छोटा नहीं निकला।
अपने बिल पर रुपयों का हिसाब
यह प्रतिशत फिक्स्ड चार्ज और एनर्जी चार्ज के जोड़ पर लगता है, पूरे बिल पर नहीं। बिजली ड्यूटी और अन्य उपकर इसके दायरे से बाहर हैं। नवंबर के −9.17% पर:
| आपके बिल का फिक्स्ड + एनर्जी चार्ज | अक्टूबर के −5.24% पर बचत | नवंबर के −9.17% पर बचत |
| ₹1,000 | ₹52.40 | ₹91.70 |
| ₹2,500 | ₹131.00 | ₹229.25 |
| ₹5,000 | ₹262.00 | ₹458.50 |
ड्यूटी FPPAS के बाद बची रकम पर लगती है, इसलिए ड्यूटी लाइन भी थोड़ी घटेगी और कुल बचत तालिका से थोड़ी और ज्यादा बनेगी। पैमाने के लिए: सितंबर का −7.93% करीब ₹604 करोड़ और अक्टूबर का −5.24% करीब ₹424 करोड़ का रहा। नवंबर का अनुमान दोनों से ऊपर है।
बिजली खरीद की लागत गिरती क्यों रही
टैरिफ ऑर्डर में खरीद की स्वीकृत औसत लागत ₹4.94 प्रति यूनिट तय है, और वास्तविक लागत लगातार इससे नीचे रही है। जुलाई का पूरा हिसाब, जो अब तक का ताज़ा सार्वजनिक आंकड़ा है, बताता है कि यूपीपीसीएल ने 16,407.07 मिलियन यूनिट बिजली ₹4.69 प्रति यूनिट में खरीदी, स्वीकृत दर से करीब 25 पैसे सस्ती। वह महीना मानसून के चरम में था, पनबिजली उत्पादन अच्छा रहा और शॉर्ट-टर्म बाजार की बिजली सस्ती मिली। कुमार ने इसे खरीद लागत के प्रभावी प्रबंधन से जोड़ा है। अगस्त का पूरा हिसाब हर महीने की तरह यूपीपीसीएल के टैरिफ पेज पर आएगा।
आपको क्या करना चाहिए
- नवंबर का बिल आते ही FPPAS लाइन देखिए। वह फिक्स्ड प्लस एनर्जी चार्ज पर −9.17% दिखानी चाहिए, और रकम करीब उस हिस्से × 9.17% के आसपास रहनी चाहिए। थोड़ा-बहुत राउंडिंग अंतर सामान्य है।
- बिजलीबाबू बिल कैलकुलेटर से FPPAS समेत पूरा बिल दोबारा मिलाइए, और अक्टूबर के लेख में सरचार्ज की पूरी प्रक्रिया पढ़िए। अगर बिल पर प्रतिशत घोषित आंकड़े से अलग हो, तो 1912 पर शिकायत दर्ज कीजिए।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026; न्यूज़18 यूपी, 28 अक्टूबर 2026; एनडीटीवी इंडिया, 28 अक्टूबर 2026; सीएनबीसी-टीवी18, अक्टूबर 2026 का FPPAS हिसाब; यूपीपीसीएल टैरिफ पेज, मासिक FPPAS आदेश।