दशहरा बीत चुका है। असली परीक्षा आगे है: 8 नवंबर को दिवाली, और फिर 13 से 16 नवंबर तक छठ, जब घाट रातभर रोशन रहते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली निगम को निर्देश दिया है कि पूरे इस दौर में आपूर्ति बिना रुकावट चले। जनपदों, तहसीलों और ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे बिजली के आदेश जारी हो चुके हैं। यहाँ जमीनी स्तर पर यूपीपीसीएल क्या कर रहा है, और इस भारी खपत वाले दौर में आपके बिल पर क्या असर पड़ेगा, दोनों समझ लीजिए।
आदेश: त्योहारों की हर रात के लिए बिजली

डिस्कॉमों को निर्देश साफ है। पूरे त्योहारी दौर में रोस्टर से ज्यादा आपूर्ति चले, शहरों की तरह गाँवों में भी। अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल ने डिस्कॉमों के प्रबंध निदेशकों और मुख्य अभियंताओं से कहा है कि मंदिरों, शक्तिपीठों और अन्य धार्मिक स्थलों को तय समय-सारिणी के अनुसार बिजली मिले। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नीतीश कुमार ने बताया कि तैयारी में गाँव, शहर, नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र सब शामिल हैं।
वादे के पीछे का काम रूटीन है, पर अहम है। पाँचों डिस्कॉम निवारक रखरखाव कर रहे हैं: मध्यांचल, पश्चिमांचल, पूर्वांचल, दक्षिणांचल और कानपुर का केस्को। लाइनें और उपकरण जांचे जा रहे हैं। तारों को छूने वाली पेड़ की डालियाँ कटवाई जा रही हैं, क्योंकि हवा वाली रात में फीडर ट्रिप होने की सबसे आम वजह यही होती है। पूर्वांचल क्षेत्र की टीमें, जहाँ छठ का सबसे भारी बोझ आता है, चौबीसों घंटे ड्यूटी पर हैं।
ग्रामीण इलाकों के लिए एक बात साफ रखें: इसका मतलब यह नहीं कि रोस्टर हमेशा के लिए हट गया। ग्रामीण फीडर आम तौर पर तय घंटों पर चलते हैं, और त्योहारों के बाद वही रोस्टर लौट आएगा। यूपीपीसीएल ने सिर्फ त्योहारी दौर के लिए रोस्टर से आगे आपूर्ति का आदेश दिया है, ताकि दशहरे, दिवाली और छठ की रातों में गाँवों को भी शहरों जैसी रोशनी मिले।
वादे के पीछे के आंकड़े
यह वादा आंकड़ों के सहारे खड़ा है। यूपीपीसीएल के अनुसार 17 अक्टूबर को 23,738 मेगावाट, 16 अक्टूबर को 23,372 मेगावाट और 18 अक्टूबर को 22,540 मेगावाट की मांग पूरी हुई। ये आम कामकाज वाले दिन थे, त्योहारों की चरम मांग नहीं। कंपनी का यह भी कहना है कि मांग पूरी करने में यूपी ने इस दौरान तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से बेहतर किया।
| दिन | पूरी हुई मांग (मेगावाट) |
| 16 अक्टूबर 2026 | 23,372 |
| 17 अक्टूबर 2026 | 23,738 |
| 18 अक्टूबर 2026 | 22,540 |
त्योहारों के हफ्ते इस आंकड़े को और ऊपर ले जाते हैं। सजावटी रोशनी ज्यादा घंटे जलती है, और छठ पर नदियों-तालाबों के पास रातभर खपत चलती है। यही वह दौर है जिसके लिए ये तैयारियाँ हो रही हैं।
आपके बिल पर इसका असर
आपूर्ति के घंटे बढ़ेंगे तो घर की यूनिट भी बढ़ेंगी। टैरिफ की तरफ से कुछ नहीं बदला है। यूपीईआरसी की FY 2026-27 दरें जहाँ थीं, वहीं हैं, और एफपीपीएस लाइन अलग काम करती है। अक्टूबर के बिलों में इसमें छोटी राहत मिली है, ईंधन सरचार्ज में 5.24% की कटौती, जिसकी हमने पिछली पोस्ट में विस्तार से बात की थी। यह संशोधन ईंधन लागत पर लगता है, यूनिट पर नहीं, इसलिए त्योहारों की खपत स्लैब दर पर ही बिलेगी।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खर्च सजावटी रोशनी का है। हर बल्ब छोटा लगता है, पर पुराने फिलामेंट सीरियल लाइट जुड़ते जाते हैं। एक उदाहरण देखिए। इसमें शहरी घरेलू श्रेणी की संकेतात्मक दर ली गई है, पहली 150 यूनिट पर लगभग ₹5.50 प्रति यूनिट, और माना गया है कि रोशनी दशहरे से दिवाली तक रात में पाँच घंटे जलती है, यानी लगभग 20 रातें।
| सजावटी रोशनी (रात में 5 घंटे, 20 रातें) | जुड़ी यूनिट | ₹5.50 प्रति यूनिट की दर से खर्च |
| 10 LED बल्ब, हर एक 8 वाट | 8 यूनिट | ₹44 |
| 10 पुराने फिलामेंट बल्ब, हर एक 40 वाट | 40 यूनिट | ₹220 |
| फर्क | 32 यूनिट | ₹176 |
अगर आपका महीने का कुल यूज 150 यूनिट पार कर जाता है तो आगे की यूनिट लगभग ₹6.00 प्रति यूनिट की दर से बिलती हैं, यानी यही बदलाव और ज्यादा बचाएगा। ग्रामीण घरेलू स्लैब की दरें इससे कम हैं। आखिरी बात आपके अपने बिल की ही मानी जाएगी, और उसका अंदाजा आप एक मिनट में यूपीपीसीएल बिल कैलकुलेटर से लगा सकते हैं।
दिवाली से पहले आप क्या करें
पहला काम, प्रीपेड स्मार्ट मीटर पर बिजली है तो त्योहार वाले दिन का इंतजार न करें, पहले रिचार्ज कर लें। दिवाली की रात बैलेंस खत्म होना अपनी ही लापरवाही से बनी बिजली कटौती है। यूपीपीसीएल के अपने नोट्स में प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा दर पर 2% की छूट की बात भी है। यूपीपीसीएल स्मार्ट ऐप रोज का यूज भी दिखाता है, जिससे पता चलता है कौन सा उपकरण यूनिट खा रहा है।
दूसरा काम, अपनी सजावटी रोशनी की वायरिंग देख लें। LED स्ट्रिंग इस्तेमाल करें, एक प्लग पॉइंट पर लगाएँ, और जोड़ी हुई तारों वाली वायरिंग या बाहर खंभे पर हुक लगाने से बचें। दिवाली की ज्यादातर ट्रिपिंग और आग उसी सस्ते एक्सटेंशन से शुरू होती है, सबस्टेशन से नहीं।
अगर बिजली फिर भी गुल हो गई
वादे अलग चीज हैं, तूफानी रात में गिरा हुआ तार अलग चीज। अगर आपके इलाके में बिजली गुल हो जाए तो 1912 पर कॉल करें या यूपीपीसीएल स्मार्ट ऐप पर शिकायत दर्ज करें, और शिकायत नंबर संभाल कर रखें। त्योहारी दौर में टीमें ड्यूटी पर हैं, इसलिए जल्दी दर्ज शिकायत का जल्दी निपटारा होने की संभावना रहती है। अगर शिकायत दिनों तक अनसुनी पड़ी रहे तो यही नंबर आपको अनुखंड कार्यालय में गुहार लगाने का हक देता है।
छठ के लिए एक और बात। अरघ्या के घंटों में घाटों और नदी किनारे वाले इलाकों को आपूर्ति में तरजीह मिलती है, और उससे पहले के दिनों में घाटों के पास जनरेटर जांचती टीमें आपको दिख सकती हैं। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं तो भारी उपकरणों का इस्तेमाल शाम और सुबह के अरघ्या के बाद करने की सोचें, उसी वक्त नहीं।
स्रोत:
- कंस्ट्रक्शन वर्ल्ड, 23 अक्टूबर 2026: https://www.constructionworld.in/energy-infrastructure/power-and-renewable-energy/up-assures-uninterrupted-power-supply-during-festive-season/99263
- यूएनआई, 19 अक्टूबर 2026: http://103.115.194.21/uninterrupted-power-supply-during-festivals-up-to-remain-illuminated-from-villages-to-cities-on-dussehra/north/news/4014126.html
- एनर्जेटिका इंडिया: https://www.energetica-india.net/news/uttar-pradesh-promises-uninterrupted-power-supply-for-upcoming-festivals
- त्योहारों की तारीखें: द्रिक पंचांग (छठ पूजा 2026), न्यूज18 छठ कैलेंडर
- FY 2026-27 की संकेतात्मक घरेलू स्लैब दरें: https://uppclbillcalculator.com/how-to-reduce-electricity-bill-in-up/